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NIA Raid Gopalganj: कंबोडिया साइबर फ्रॉड कनेक्शन में गोपालगंज में एनआईए की बड़ी कार्रवाई, एजेंट के घर 5 घंटे तक छापेमारी

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Alam Ki Khabar: कंबोडिया में नौकरी के नाम पर साइबर फ्रॉड कराने के आरोपों की जांच में एनआईए ने गोपालगंज के साधु चौक स्थित एक एजेंट के घर छापेमारी की। कई दस्तावेज खंगाले गए और एजेंट को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया गया।

गोपालगंज/आलम की खबर:विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित साइबर फ्रॉड नेटवर्क की जांच अब बिहार तक पहुंच गई है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने गोपालगंज शहर के साधु चौक इलाके में एक एजेंट के घर करीब पांच घंटे तक सघन छापेमारी कर कई अहम दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की। कार्रवाई के दौरान स्थानीय पुलिस भी एनआईए टीम के साथ मौजूद रही। पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और घर के आसपास लोगों की आवाजाही पर नजर रखी गई।

यह कार्रवाई पश्चिम चंपारण जिले के एक युवक की शिकायत के बाद की गई। युवक ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2024 में उसे कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी का झांसा देकर कंबोडिया भेजा गया, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उससे कथित तौर पर ऑनलाइन साइबर फ्रॉड का काम कराया जाने लगा। किसी तरह भारत लौटने के बाद उसने पूरे मामले की शिकायत राष्ट्रीय जांच एजेंसी से की, जिसके बाद जांच शुरू हुई।

जांच के दौरान एनआईए अधिकारियों ने एजेंट के घर से विदेश भेजने से जुड़े दस्तावेज, पासपोर्ट और वीजा रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन से संबंधित कागजात तथा डिजिटल उपकरणों की जांच की। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं यह मामला किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क से तो जुड़ा नहीं है।

आरोपी एजेंट प्रदीप सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने युवक को वैध तरीके से कंप्यूटर ऑपरेटर की नौकरी के लिए कंबोडिया भेजा था। वहां पहुंचने के बाद युवक ने फोन कर बताया कि उससे जबरन ऑनलाइन फ्रॉड कराया जा रहा है। एजेंट का दावा है कि उन्होंने युवक की भारत वापसी के लिए आर्थिक मदद की, उसका खर्च लौटाया और बाद में दुबई का वीजा भी उपलब्ध कराया।

प्रदीप सिंह के अनुसार उन्होंने एनआईए अधिकारियों को पैसे लौटाने, वीजा प्रक्रिया और अन्य लेनदेन से जुड़े दस्तावेज भी सौंप दिए हैं। हालांकि एजेंसी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें कानूनी नोटिस जारी कर 10 जुलाई को पटना स्थित एनआईए कार्यालय में पूछताछ के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया है।

फिलहाल एनआईए ने इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ और जब्त किए गए दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि जांच में किसी बड़े साइबर नेटवर्क या मानव तस्करी से जुड़े सबूत मिलते हैं तो मामले में और भी लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।

हाल के वर्षों में विदेश में आकर्षक नौकरी का झांसा देकर युवाओं को दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में भेजने और वहां साइबर ठगी जैसे अवैध काम कराने के कई मामले सामने आए हैं। केंद्रीय एजेंसियां ऐसे नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई कर रही हैं और युवाओं से केवल अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से ही विदेश जाने की अपील कर रही हैं।

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विदेशी नौकरी के नाम पर बढ़ता साइबर जाल चिंता का विषय

विदेश में बेहतर नौकरी का सपना दिखाकर युवाओं को अवैध गतिविधियों में धकेलना गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में केवल एजेंसियों की कार्रवाई ही नहीं, बल्कि युवाओं की जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। किसी भी विदेशी नौकरी के प्रस्ताव की पूरी जांच-पड़ताल करना समय की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है।

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